C-section सजा या मज़ा

C-section सजा या मज़ा

अनुराधा बहुत परेशान थी,उसकी  delivery का समय जैसे जैसे पास आ रहा था वो और घबरा रही थी। वैसे उसके 8 महीने पुरे हो चुके थे और ये उसका दूसरा बच्चा था, पर उसे डर इस बात का था की पहला बच्चे के समय कुछ complication थे जिसकी वजह  से उसे caesarean करवाना पड़ा था और सबकी बहुत बातें सुननी पड़ी थी, पर अब वो ये सब बातें नहीं सुनना चाहती थी। ये सब सोचते सोचते उसे अपने पहले बच्चे के समय हुई बातें याद आने लगी।

          जब उसे पहली बार पता चला की उसे caesarean करवाना पड़ेगा तो हर पहली माँ की तरह वो डर गयी, उसे लगा की कंही उस से कोई गलती तो नहीं हुई। पर डॉक्टर ने उसे समझाया की इसमें उसकी कोई गलती नहीं है कुछ natural complication  की वजह से ऐसा है।अनुराधा ने जब घर आ कर अपनी सास को ये सब बताया तो लगा की जैसे घर में भूचाल आ गया हो ,अनुराधा को समझ नहीं आया की ये क्या हुआ, उसकी सास ने बिना कुछ सुने कहना शुरू कर दिया की ये आज कल की लड़कियां बिलकुल मेहनत नहीं करना चाहती है, हर काम आसानी से हो जाय,घर में दिन रात काम किया होता तो ये नौबत ना आती,अब जाएगी और पेट फड़वा कर आ जायेगी, इन्हे तो इसी में मज़ा आता है। अनुराधा को समझ नहीं आया की इन सब मे उसकी क्या गलती है, वो तो खुद caesarean नहीं चाहती थी,पर डॉक्टर ने complication बताये तो करवाना पड़ेगा, उसे लगा था की उसकी सास ये सब समझेंगी क्यूंकि वो खुद एक माँ हैं, पर यंहा तो सब उल्टा है। पर इन सब के बीच कोई उसके साथ था तो वो था उसका पति, विनय  ।

 मुझे समझ नहीं आता की क्यों लोग नहीं समझ पाते की चाहे आज की generation हो या पुरानी,कोई भी ख़ुशी से caesarean नहीं करवाता। बहुत हिम्मत का काम है ये decision लेना,कौन चाहेगा ज़िंदगी भर precautions रखना।ऐसे में एक pregnant lady को emotional support  की सबसे ज्यादा जरूरत होती है,पर अधिकतर घरों में उल्टा उन्ही को सुनाया जाता है की उनकी वजह से ये सब हुआ।

अनुराधा को पहला बच्चा एक लड़का हुआ, सब खुश थे, बच्चे को हाथो हाथ लेकर घूम रहे थे पर अनुराधा को देखने वाला कोई नहीं। मैं ये नहीं कह रही की बच्चे को क्यों इतना attention दे रहे थे, बल्कि में कहना चाहती हूँ की एक नयी माँ को भी उस समय प्यार और अपनेपन की जरूरत होती है।

अनुराधा घर आ गयी थी, डॉक्टर ने उसे 1 महीने का bed rest  और 3 महीने तक भरी सामान उठाने से मना किया था। पर ये क्या 10-12 दिन बाद ही उसकी सास ने उसे ताना मारना शुरू कर दिया की ये आज कल की लड़कियों को आराम का बहाना चाहिए,हम तो 10 दिन बाद ही काम करने लगे थे सारे घर के। ये सब सुन सुनकर अनुराधा थक चुकी थी तो उसने भी 15 दिन बाद ही काम करने शुरू कर दिये,विनय ने उसे रोका भी तो उसने खुद ही मना कर दिया की उसे कोई तकलीफ नहीं है, विनय अपनी माँ से भी इस बारे में बात करना चाहता था पर अनुराधा ने ही उसे मना कर दिया। और नतीजा ये हुआ की अनुराधा के stitches खुल गए।अनुराधा सब सोच ही रही थी की कैसे उसने ये सब झेला था की विनय की आवाज़ आ गयी : अनुराधा आज डॉक्टर के यंहा चलना है।

अनुराधा भारी मन से डॉक्टर से मिली तो डॉक्टर ने फिर से caesarean की सलाह दी,क्यूंकि पहला बच्चा caesarean से था तो वो कोई risk नहीं लेना चाहती।

अनुराधा बहुत डर गयी थी पर उसने decide किया की इस बार वो अपने साथ भी लापरवाही नहीं बरतेगी। अगर सास उसे मदद नहीं करेंगी तो वो अपनी माँ के पास जाएगी पर अपना भी ध्यान रखेगी, विनय ने भी हाँ कर दी थी।घर में फिर से थोड़ा नाटक हुआ पर इस बार अनुराधा ने भी कह दिया की मम्मीजी caesarean करवाना एक सजा है ना की मज़ा।और अगर वो उसका ध्यान नहीं रख पाएंगी तो वो इस बार अपने मायके जाएगी पर कोई लापवाही नहीं बरतेगी।

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