नयी बहु : लछमी या अपशगुनी


नयी बहु : लछमी या अपशगुनी

सरला जी आज बहुत खुश थी, आज उनके बेटे विनय की शादी थी। थोड़ी देर में बारात भी चली गयी,सरला जी का घर मेरठ में था और बारात मेरठ से मुरादाबाद गयी थी। सरला जी घर पर ही रुकी,उन्हें अपनी बहु आशा के स्वागत की तैयारियां जो करनी थी।

उधर शादी में भी सब कुछ ख़ुशी के साथ पूरा हुआ। अगले दिन सुबह सरला जी की बेटी वैभवी का फ़ोन आया की बारात विदा हो गयी है  और सब घर के लिए आ रहे हैं।

वैभवी विनय से बड़ी थी। उसकी शादी ग्वालियर हुई थी,वो अपने पति और दो बच्चो के साथ शादी के लिए आयी थी।

वैभवी अपनी नयी भाभी आशा और भाई वाली कार में ही मुरादाबाद से मेरठ के लिए निकली। सब बहुत खुश थे, की अचानक उन्हें रास्ते में एक कार एक्सीडेंट हुई मिली,क्यूंकि कार में नई दुल्हन थी तो विनय और वैभवी ने कार रोक कर नहीं देखा की कैसे एक्सीडेंट हुआ और कौन है उसमे ,वो बस उन लोगो की किस्मत पर अफ़सोस करते चले गए।

घर में सरला जी भी ख़ुशी से बहु के स्वागत की तैयारियां कर रही थी की अचानक एक फ़ोन आया ,बारात की एक कार का रास्ते में एक्सीडेंट हो गया है, और उस एक्सीडेंट में घर के जमाई यानि वैभवी के पति की मौत हो गयी है ।ये सुनकर सरला जी के होश उड़ गए , पर किसी ने भी वैभवी को फ़ोन नहीं किया और उसके घर आने का इंतज़ार किया।

दरअसल रास्ते में जिस गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ विनय और वैभवी ने देखा था, उसमे वैभवी का पति ही था ।  भीड़ होने की वजह से वैभवी को ना कार दिखी और ना ही उसका पति।पीछे से जब और बाराती आये और उन्होंने रुक कर देखा तो पता चला की ये तो उन्ही के लोग हैं।

                     इधर सरला जी को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे। घर के दो दरवाज़े थे, एक पर बहु की गाड़ी आकर रुकी और दूसरे पर उनके जमाई को लेकर लोग आ गये।घर में शोर मच गया।

                आशा गाड़ी से उतरी, पर ये क्या,नयी बहु के स्वागत के लिए कोई नहीं था। आशा को समझ नहीं आया की कोई क्यों नहीं है उसके स्वागत के लिए, क्या उससे कोई गलती हुई ,पर वो तो अभी घर के अंदर तक नहीं गयी। ये सब आशा सोच रही थी की एक औरत आयी और वैभवी को जल्दी से ले गयी।अब आशा से रुका नहीं गया, उसने विनय से पूंछा की कोई क्यों नहीं है, पर विनय को भी नहीं पता था। आशा ने सोचा की वो ऐसे ही घर के अंदर जाएगी और देखती है की कोई क्यों नहीं है यंहा।

                 आशा ने घर में जाकर देखा की सब एक साइड को जा रहे हैं तो आशा और विनय भी उधर गए,वंहा सब रो रहे थे , जो वैभवी अभी हंस रही थी थोड़ी देर पहले , वो भी बहुत रो रही है और सरला जी का रो रोकर बुरा हाल है,कुछ लोग उन्हें चुप करा रहे हैं तो कुछ बहु को कोस रहे हैं की कैसी बहु है,घर में आते ही जमाई को खा गयी, ये  बहु लछमी नहीं अपशगुनी है ।

        आशा को बात समझते देर नहीं लगी और वो ये भूलकर की वो आज ही इस घर में आयी है ,अपनी सास और वैभवी को सम्हालने चली गयी और एक बहु का फ़र्ज़ अदा करने लगी। पर लोग उसे अपशगुनी कहने से चुप नहीं हो रहे थे ।सरला जी सब देख रही थी और सुन रही थी पर बेटी का दुःख बहुत बड़ा था तो उसे सम्हालने में लगी थी।

            इधर आशा के घर वालों को जैसे ही पता चला इन सब का ,वो तुरंत मेरठ आ गये।अब सब को ग्वालियर जाना था, वैभवी की ससुराल में।आशा के मम्मी पापा और भाई भी साथ जाने लगे।

             तब सरला जी ने आशा के घरवालों को कहा की सिर्फ आशा के पापा साथ आ जाए अगर आना चाहते हैं तो,बाकि आशा की मम्मी और भाई, आशा को अपने साथ मुरादाबाद घर वापस ले जाए।

                  घर वापस ले जाने की बात से आशा के घरवालों को होश उड़ गए, वो हाथ जोड़कर खड़े हो गये की हमारी बेटी की इसमें कोई गलती नहीं, वो अपशगुनी नहीं ,उसे घर ना भेजे इस तरह से।सरला जी ने भी तुरंत हाथ जोड़ लिए, उन्होंने कहा की आपने मुझे गलत समझा, मेरी बहु अपशगुनी नहीं लछमी हैं मेरे घर की, और अब ये आपके साथ मेरे घर की अमानत बनकर जा रही है। इस समय हमारे घर के हालत कुछ ऐसे हैं की हम अपनी लछमी का स्वागत नहीं कर पायेंगे,मुझे इस बात का भी दुःख है की आशा को घर में बिना आरती के आना पड़ा, और कुछ लोगो की बातें भी सुननी पड़ी, में नहीं चाहती की कोई इसे कुछ कहे ।पर क्या करते समझ नहीं आ रहा था की ये सब क्या हो गया।सरला जी ने कहा की अभी कुछ दिन बाद घर के हालत जब ठीक हो जाएंगे तो वो खुद अपने परिवार के साथ आएँगी आशा को लेने।इसके बाद आशा वापस अपने घर आ गयी।

             फिर 20 दिन बाद सरला जी अपने बेटे और पति के साथ गयी अपनी बहु को लेने ।इस बार विदाई के समय आशा के मम्मी पापा की आँखों में आंसू तो थे पर उसमे ये ख़ुशी भी थी की आशा को इतना अच्छा ससुराल मिला है और आशा भी खुश थी की उसे अपनी सास में फिर से उसकी माँ मिल गयी है जो उसे कभी अपशगुनी नहीं कहेगी और बेटी की तरह प्यार करेगी।

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